Sunday, August 25, 2024

बाशिंदा

Bahr (1222 1222 1222 1222)

मुझे बेशक सराहो मत मगर इक बात कहने दो 
तुम्हारी क़ौम में यारों मुझे बाशिंदा रहने दो 

सभी को खोना है इक दिन आसमाँ के सितारों में 
अभी तुम ज़िंदा हो जैसे मुझे भी ज़िंदा रहने दो

शहर में पेड़ हरियाली किसे अब रास आते हैं  
मगर खुद पर तरस खाओ ख़ुदी को ज़िंदा रहने दो
[ख़ुदी = fear of God]

मुझे बचपन से जाने क्यूँ बोहोत उड़ने की आदत थी  
खयालातों की दुनिया है मुझे तुम रिंदाँ रहने दो 
[रिंदाँ = carefree]

सिपा सालार कहते हैं तेरी क़ुर्बानी लाज़िम है 
शहीदों में गिनाएंगे फ़लक पे झंडा रहने दो

ज़रा मुर्ग़ी कि मम्ता देख एक दिन मुझसे कहती है 
मुझे चाहो पका खा लो मगर ये अंडा रहने दो 

ना देखी जाएगी मुझसे दरिंदों की ये सौग़ातें 
मैं अंधा था मैं अंधा हूँ मुझे तुम अंधा रहने दो






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मुझे बेशक सराहो मत मगर कुछ बातें कहने दो 
मुझे इस क़ौम में यारों एक बाशिंदा रहने दो 

कहीं कुछ सीख ना लूँ इस लिए शर्मिंदा रहने दो 
मुझे इस क़ौम में यारों एक बाशिंदा रहने दो 

यहाँ के पेड़ हरियाली किसे अब रास आते हैं  
मेरे घर का एक पौधा मगर तुम ज़िंदा रहने दो 

मुझे मत दो बाग़ कोई आसमा भी छुपा लेना 
मगर एहसान ये करना बस एक बराम दा रहने दो 

ना देखी जाएगी मुझसे अब दरिंदों की सौग़ातें 
मैं अंधा था मैं अंधा हूँ मुझे तुम अंधा रहने दो 

मुझे बचपन से जाने क्यूँ बोहोत उड़ने की आदत थी  
ख़यालातों की दुनिया है मुझे परिंदा रहने दो 

सिपाह सालार कहते हैं तेरी क़ुर्बानी लाज़िम है 
शहीदों में गिनाएंगे हाथ में झंडा रहने दो

एक मुर्ग़ी की ममता देख एक दिन मुझसे कहती है 
गोश्त चाहो मेरा खा लो मगर ये अंडा रहने दो 

मुझे बेशक सराहो मत मगर कुछ बातें कहने दो 
मुझे इस क़ौम में यारों एक बाशिंदा रहने दो 

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