मेरे दिल में कोई समाने लगा है
कोई ख़ाब सा फिर से छाने लगा है
तरसती हैं आँखें जिसे देखने को
वो रह रह के फिर याद आने लगा है
शबे हुस्न का एक छोटा सा मंज़र
मुझे दिन दिहाड़े सताने लगा है
मैं ये सोचता हूँ ये रिश्ता है कैसा
सनम ही मेरा दिल जलाने लगा है
बड़ी देर से नींद आई थी मुझको
ये कौन आ के मुझको उठाने लगा है
हवा ले के आई सनम तेरी ख़ुशबू
जवाँ दिल ये मेरा कमाने लगा है
मुआ बेसुरा जाने क्यों ये मेरा दिल
किसी सुर से फिर सुर मिलाने लगा है
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