Friday, December 19, 2025

सुर

मेरे दिल में कोई समाने लगा है

कोई ख़ाब सा फिर से छाने लगा है

तरसती हैं आँखें जिसे देखने को

वो रह रह के फिर याद आने लगा है


शबे हुस्न का एक छोटा सा मंज़र

मुझे दिन दिहाड़े सताने लगा है


मैं ये सोचता हूँ ये रिश्ता है कैसा

सनम ही मेरा दिल जलाने लगा है


बड़ी देर से नींद आई थी मुझको

ये कौन आ के मुझको उठाने लगा है

 

हवा ले के आई सनम तेरी ख़ुशबू  

जवाँ दिल ये मेरा कमाने लगा है


मुआ बेसुरा जाने क्यों ये मेरा दिल

किसी सुर से फिर सुर मिलाने लगा है


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