Bahr: 2122 1122 112
इस क़दर वक़्त है मसरूफ यहाँ
वक्त को खुद ही नहीं वक्त मिला
सबको देते हो जो भी मांगे तुझे
ऐसा क्या था जो तुझे भी न मिला
आँख किसकी मिली पहले क्या पता
हाल क्या पूछते हो दिल का मेरे
चैन तुझको न मिला मान लिया
तेरी सौगंध मुझे भी न मिला
दिल से गर दिल कि सदा मिल न सकी
दोस्त कैसे तु बनायेगा बता
दोस्त साज़ों की तरह हैं ये तेरे
साज़ के ताल से तू ताल मिला
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