Thursday, November 7, 2024

ताल

Bahr: 
  • 2122
  • 1122
  • 112
  • इस क़दर वक़्त है मसरूफ यहाँ 
    वक्त को खुद ही नहीं वक्त मिला 
    सबको देते हो जो भी मांगे तुझे
    ऐसा क्या था जो तुझे भी न मिला

    आँख किसकी मिली पहले क्या पता 
    हाल क्या पूछते हो दिल का मेरे 
    चैन तुझको न मिला मान लिया 
    तेरी सौगंध मुझे भी न मिला 

    दिल से गर दिल कि सदा मिल न सकी 
    दोस्त कैसे तु बनायेगा बता 
    दोस्त साज़ों की तरह हैं ये तेरे 
    साज़ के ताल से तू ताल मिला 

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