Thursday, January 2, 2025

ग़ज़ब इंतिहा है

ये कैसा अजब इश्तिहारी जहाँ है
जो देखा सुना है उसी का धुआँ है 

मैं तन्हाइयों में यही सोचता हूँ
मेरी चाहतें मेरी खुद की कहाँ है

सरे सेहरा दरिया निकल आ रहा है
कोई तो बता दे ये क्या हो रहा है

ऋषि केश काबा गया या बनारस 
जहाँ किसको ढूँढे वो मिलता कहाँ है

मोहब्बत है गूंगे को कातिल से 'ज़ाहिर'
करे क्या के बेचारा ख़ुद बेज़ुबाँ है

ढिंढोरा पिटा है ख़ुदा तेरी ख़ातिर
फ़रेबी जहाँ की ग़ज़ब इंतिहाँ है

No comments:

Post a Comment

अफ़वाही ज़िंदगी

किसको है मिला सुकूँ   किसको है मिली ख़ुशी   अफ़वाही है, अफ़वाही है   अफ़वाही ज़िंदगी   ख़ुशियों की जुस्तजू में   हर कोई मिला दुखी   अफ़वाही ...