धुँदली यादों की चाहत में क्यों अपने सपने खोता है
जो होता है गर चाहो तो जो चाहोगे वो होता है
सब कुछ मिल पाना मुश्किल है कुछ ना कुछ तो कम होता है
जितना ज़्यादा मिल जाता है उतना पाने को रोता है
सब जाने है इस दुनिया में जो होता है क्यों होता है
काँटे अक्सर इन्साँ खुद ही 'ज़ाहिर' है ख़ुद ही बोता है
कहते हैं के इस दुनिया में जो सोता है वो खोता है
मुझको तो ऐसा लगता है जो खोता है वो सोता है
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