Thursday, January 9, 2025

तोता

ये जो होता है, जो भी होता है 
कोई हँसता है, कोई रोता है 
सब सिखाया है, सब पढ़ाया है  
मैं भी तोता हूँ, तू भी तोता है 

झूठ सूरज है झूठ तारे हैं 
झूठ मौसम के सब इशारे हैं 
झूठ है के तुम भी इन्हीं से हो 
झूठ ये भी के ये तुम्हारे हैं 
 
वक़्त धोखा है जिसमे जीते हो 
वक़्त धोखा है जिसमे मरते हो 
सच नहीं है ये इस घड़ी में भी 
मैं जो कहता हूँ तुम जो सुनते हो 

कौन कहता है मर गया कोई  
कौन कहता है खाली पन है अब 
ये तो 'ज़ाहिर' है कुछ नहीं बदला 
काम पे जा ही तो रहे हैं सब 

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