Friday, September 27, 2024

ज़ियादती

ये फ़नकारों की कहते हैं अलामती नहीं करते 

दिल से करते हैं तारीफ़ें बनावटी नहीं करते 

बड़ी खूबी से रखते हैं नाम सबका ये अज़मत से 

ज़िया की आदत है ये भी ज़ियादती नहीं करते 


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जो झलक भी न दिखाए तो फज़ल ही क्या है 

जो समझ सबके ही आये वो अज़ल ही क्या है 

जो तुझे सैर कराये ना  हकीकत की तरह 

जो तरन्नुम न सजाये वो ग़ज़ल ही क्या है 

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