Wednesday, September 18, 2024

फ़रेबी

वो मेरा दिल से हो न पाया कभी 
दाग़ मैं दिल के धो न पाया कभी 
चाहे इस बात को कुछ यूँ कह लो 
मैं किसी का भी हो ना पाया कभी 

क्योंकि खुशियां भी सलामत न रहीं
मुझको खुशियों की भी आदत न रही
मेरे दुश्मन भी जानते हैं मैं
अपनी ख़ुशियों में खो ना पाया कभी
चाहे इस बात को कुछ यूँ कह लो
मैं किसी का भी हो ना पाया कभी

मैं आदमी के जिस्म में हूँ बसा 
मुझको लोगों ने... जब जब है डँसा  
अश्क़ भी मेरे फ़रेबी निकले 
रोना चाहा तो रो ना पाया कभी 
चाहे इस बात को कुछ यूँ कह लो 
मैं किसी का भी हो ना पाया कभी 

हैसियत मेरी किस मिसाल की है 
दर असल बात ये वबाल की है 
खुद परस्ती की ऐसी दुनिया में 
फ़ैसला मेरा हो ना पाया कभी 
चाहे इस बात को कुछ यूँ कह लो 
मैं किसी का भी हो ना पाया कभी 

आज ग़मगीन सा है घर मेरा
सबने देखा तो है सफ़र मेरा
मैंने लूटे थे चैन लोगों के 
चैन से मैं भी सो न पाया कभी 
चाहे इस बात को कुछ यूँ कह लो
मैं किसी का भी हो ना पाया कभी

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