Monday, February 5, 2024

तिश्नगी

Bahr: 
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  • 22

  • तेरी यादों की चादरें घेरी 
    आँख धुनली सी हो गई मेरी 
    दिल ये डूबा है आसुओ में पर 
    तिश्नगी मिट नहीं रही मेरी 

    तुम ही तुम सांस में समाये हो 
    फिर भी क्यों याद आ रही तेरी 
    तेरे रस्ते की ताक में शायद 
    आँख पत्थर की हो गई मेरी

    आ गया फिर से प्यार का मौसम
    छिल गए घाव पक गई बेरी 
    अक्ल ये है के भूलना चाहे 
    दिल मगर है के कर रहा देरी 

    शेर दो चार इस तरह जोड़े 
    आँख माज़ी पे मैंने बस फेरी 
    शायरी है नहीं रग़ों में पर
    शायराना है ज़िन्दगी मेरी 






    ========================


    तेरे यादों की चादरें घेरी 
    आँख धुंधली सी हो गई मेरी 
    दिल सराबों में आब ढूंढे है 
    तिश्नगी मिट नहीं रही मेरी 

    ये अक्ल है के भूलना चाहे 
    दिल की धड़कन में हो रही देरी
    आ गया फिर से प्यार का मौसम
    छिल गए घाव पक गई बेरी 

    तेरे रस्ते की ताक में शायद 
    आँख पत्थर की हो गई मेरी
    तुम ही तुम हो सांस में अब तो
    सांस लेकिन न आ रही मेरी 

    तेरे यादों की चादरें घेरी 
    आँख धुंधली सी हो गई मेरी
    दिल सराबों में आब ढूंढे है
    तिश्नगी मिट नहीं रही मेरी 


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