बाग़ रंगत के गीत गाएंगे
तुम अगर इक नज़र ही देख लो दिल धड़कना भी सीख जाएंगे
तुम अगर इक नज़र ही देख लो
यूँ पुकारा ना करो टीलों से
पीछे पीछे ही चले आएंगे
तुम अगर इक नज़र ही देख लो
पीछे पीछे ही चले आएंगे
तुम अगर इक नज़र ही देख लो
लब तो हैं पर वो रोशनाई कहाँ
बात कहना भी सीख जाएंगे
तुम अगर इक नज़र ही देख लो
ज़ख़्म दिल का कुरेद कर देखो
चीज़ इक कीमती दिखाएँगे
तुम अगर इक नज़र ही देख लो
रात की बात भूल जाओ तुम
दिन बता कैसे ये बिताएंगे
तुम अगर इक नज़र ही देख लो
आँख आंसू बहाते हैं साक़ी
आंसू बहना ही भूल जाएंगे
तुम अगर इक नज़र ही देख लो
तेरी शतरंज में मिसाल कहाँ
खुद की बाज़ी से मात खाएंगे
तुम अगर इक नज़र ही देख लो
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