Tuesday, February 27, 2024

न होते

कुछ रिश्तों के नाम न होते 
तो उनके अंजाम न होते 
राह पे गर मुड़ना ना होता 
तुम पर ये इलज़ाम न होते 

अश्कों से ख़ुद ही धुल जाते 
गर उनके हमाम न होते 

पहले जा कर मिल लेते तो 
तुम इतने हैरान न होते 

अपनी महफ़िल कौन सजाता 
जो इतने निज़ाम न होते 

हम जो न रुकते तेरी खातिर 
वो तेरे पैग़ाम न होते 

दिल से दिल तक बात पोहोचती 
तो जलसे सुनसान न होते 

प्यार से माँगा होता तुमने 
इस ख़िदमत के दाम न होते 

सब के सब गर मुलहद होते 
मंदिर में फिर राम न होते 

जंगल से बाहर ना निकलते 
तो फिर हम इंसान न होते 




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