Behr (2122 1212 22)
ममता
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पूछता था किसी से कल कोई
क्या है आखिर ये मेहरबाँ होना
दिल ने तस्वीर ये तसव्वुर की
माँ के पल्लू का आसमाँ होना
पूजा
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गर इबादत का है तरीक़ा के
रूह को खुद है राब्ता होना
क्यों है दरकार फिर इबादत में
बेग़रज़ कोई दरमियाँ होना
सच्चाई
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बात झूठी तो अच्छी लगती है
तुम को मंज़ूर था गुमाँ होना
बात क्या मैंने एक सच कह दी
लाज़मी था तेरा जुदा होना
प्यार
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प्यार की गुफ़्तगू में है मुमकिन
चंद लफ़्ज़ों का पास ना होना
उनसे मिलने के ऐन मौक़े पर
खुद जुबां का ही बेज़ुबाँ होना
सियासत
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मुल्क बनते हैं जो बिगड़ने से
उनका बेहतर है ख़ात्मा होना
क्या ये सोचा भी है कभी तुमने
कैसा लगता है बे मकाँ होना
नसीहत
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जाओ एक बार आइना देखो
छोड़ दो खुद से बे इमां होना
कैसे मंज़ूर है तुझे ऐसे
दौड़ते खून का थमा होना
ध्यान
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एक ज़रिया है ध्यान का ये भी
जिस्म से इस तरह जुदा होना
डूबना है तुझे ख़यालों में
जैसे शायर का गुमशुदा होना
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