Wednesday, October 9, 2024

माँ

Behr (2122 1212 22)

ममता 
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पूछता था किसी से कल कोई 
क्या है आखिर ये मेहरबाँ होना 
दिल ने तस्वीर ये तसव्वुर की
माँ के पल्लू का आसमाँ होना 

पूजा 
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गर इबादत का है तरीक़ा के
रूह को खुद है राब्ता होना 
क्यों है दरकार फिर इबादत में
बेग़रज़ कोई दरमियाँ होना

सच्चाई 
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बात झूठी तो अच्छी लगती है
तुम को मंज़ूर था गुमाँ होना
बात क्या मैंने एक सच कह दी
लाज़मी था तेरा जुदा होना

प्यार
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प्यार की गुफ़्तगू में है मुमकिन 
चंद लफ़्ज़ों का पास ना होना 
उनसे मिलने के ऐन मौक़े पर 
खुद जुबां का ही बेज़ुबाँ होना 
 
सियासत 
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मुल्क बनते हैं जो बिगड़ने से 
उनका बेहतर है ख़ात्मा होना 
क्या ये सोचा भी है कभी तुमने 
कैसा लगता है बे मकाँ होना 

नसीहत 
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जाओ एक बार आइना देखो 
छोड़ दो खुद से बे इमां होना 
कैसे मंज़ूर है तुझे ऐसे 
दौड़ते खून का थमा होना 
 
ध्यान
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एक ज़रिया है ध्यान का ये भी  
जिस्म से इस तरह जुदा होना 
डूबना है तुझे ख़यालों में 
जैसे शायर का गुमशुदा होना

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