देख चेहरा तू समझता क्या है
अपनी धुन पे ही लरज़ता क्या है
पैराहन देख मेरे चेहरे पे
दिल में क्या है तू समझता क्या है
प्यास है पर कोई साक़ि तो नहीं
मेरी हालत तू समझता क्या है
मेरी बातों को सुन के अक्सर तू
सर हिलाता है समझता क्या है
दिल की चोटों का तो सबब यूँ है
दिल ही नश्तर है समझता क्या है
मुझको पंछी वो ताना मार गया
ख़ुद को आज़ाद समझता क्या है
अब सफाई में क्या बताऊँ विवेक
ख़ुद का मुजरिम हूँ समझता क्या है
Monday, March 30, 2009
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अफ़वाही ज़िंदगी
किसको है मिला सुकूँ किसको है मिली ख़ुशी अफ़वाही है, अफ़वाही है अफ़वाही ज़िंदगी ख़ुशियों की जुस्तजू में हर कोई मिला दुखी अफ़वाही ...
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किसको है मिला सुकूँ किसको है मिली ख़ुशी अफ़वाही है, अफ़वाही है अफ़वाही ज़िंदगी ख़ुशियों की जुस्तजू में हर कोई मिला दुखी अफ़वाही ...
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वक्त गुज़रा हुआ सा लग रहा है और सब कुछ हुआ सा लग रहा है तुझको देखा है जबसे दिल पे मेरे कोई जादू हुआ सा लग रहा है तेरी खुशबू जो यादों ने उठाई...
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रात की बात अंधेरों में फैल जाती है धूप लेकिन किसी तारे में टिमटिमाती है इसी तरह तेरी यादों के गाँव से अक्सर तू नहीं पर तेरी ख़ुश्बू तो मिल...
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