देख चेहरा तू समझता क्या है
अपनी धुन पे ही लरज़ता क्या है
पैराहन देख मेरे चेहरे पे
दिल में क्या है तू समझता क्या है
प्यास है पर कोई साक़ि तो नहीं
मेरी हालत तू समझता क्या है
मेरी बातों को सुन के अक्सर तू
सर हिलाता है समझता क्या है
दिल की चोटों का तो सबब यूँ है
दिल ही नश्तर है समझता क्या है
मुझको पंछी वो ताना मार गया
ख़ुद को आज़ाद समझता क्या है
अब सफाई में क्या बताऊँ विवेक
ख़ुद का मुजरिम हूँ समझता क्या है
Monday, March 30, 2009
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राम भजन
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