मैनें मै पी है आज आंखों से
ज़िन्दगी जी है आज आंखों से
जो बात कह न सका कर न सका लफ़्ज़ों से
वो बात की है आज आंखों से
इक हसीं रात जिसे देख्नने की कोशिश थी
वो देख्न ली है आज आंखों से
जिस तसल्ली के लिये ठोकरें खाई थी कभी
वो तुमने दी है आज आंखों से
जो वासतों का, सबब का सवाल करते थे
वो हमन्शीं हैं आज आंखों से
उस्की बेताब सी नज़रों में मौज की लहरें
कैसे ठहरी हैं आज आंखों से
एक दिन ख्नाब में साक़ी से क्या कही थी विवेक
वही कही थी जो कही है आज आंखों से
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
तलातुम
क़िताब ए जिंदगी में बाब हूं सितारों का मैं रोशनी हूं तलातुम हूं चाँद तारों का हिजाब रुख पे बहुत मैने ओढ़ रखे हैं मुझे पता नहीं है कुछ मेरे दया...
-
ये क्या एहसास है के तू मेरे पास है यूं तो एहसास हैं अनगिनत मगर ये खास है ये क्या एहसास है ज़मीं आकाश है हवाओं में तेरी ख़ातिर कोई विश्वास है...
-
काश मिलने के इरादे कभी टलते ही नहीं साथ हम छोड़ कभी राह बदलते ही नहीं पर तरसने के लिए हम न जुदा होते तो एक दूजे के लिए फिर से मचलते ही नहीं ध...
-
किसको है मिला सुकूँ किसको है मिली ख़ुशी अफ़वाही है, अफ़वाही है अफ़वाही ज़िंदगी ख़ुशियों की जुस्तजू में हर कोई मिला दुखी अफ़वाही ...
No comments:
Post a Comment