मैनें मै पी है आज आंखों से
ज़िन्दगी जी है आज आंखों से
जो बात कह न सका कर न सका लफ़्ज़ों से
वो बात की है आज आंखों से
इक हसीं रात जिसे देख्नने की कोशिश थी
वो देख्न ली है आज आंखों से
जिस तसल्ली के लिये ठोकरें खाई थी कभी
वो तुमने दी है आज आंखों से
जो वासतों का, सबब का सवाल करते थे
वो हमन्शीं हैं आज आंखों से
उस्की बेताब सी नज़रों में मौज की लहरें
कैसे ठहरी हैं आज आंखों से
एक दिन ख्नाब में साक़ी से क्या कही थी विवेक
वही कही थी जो कही है आज आंखों से
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अफ़वाही ज़िंदगी
किसको है मिला सुकूँ किसको है मिली ख़ुशी अफ़वाही है, अफ़वाही है अफ़वाही ज़िंदगी ख़ुशियों की जुस्तजू में हर कोई मिला दुखी अफ़वाही ...
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किसको है मिला सुकूँ किसको है मिली ख़ुशी अफ़वाही है, अफ़वाही है अफ़वाही ज़िंदगी ख़ुशियों की जुस्तजू में हर कोई मिला दुखी अफ़वाही ...
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वक्त गुज़रा हुआ सा लग रहा है और सब कुछ हुआ सा लग रहा है तुझको देखा है जबसे दिल पे मेरे कोई जादू हुआ सा लग रहा है तेरी खुशबू जो यादों ने उठाई...
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रात की बात अंधेरों में फैल जाती है धूप लेकिन किसी तारे में टिमटिमाती है इसी तरह तेरी यादों के गाँव से अक्सर तू नहीं पर तेरी ख़ुश्बू तो मिल...
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